Agrasen

 

धधकती ज्वाला

Snehlata Agrawal (Ruhi)   July 7, 2020 3:52 pm
यह कविता “समाज के एक व्यक्ति के द्वारा  “ जो  बलांगीर के निवासी हैं, के द्वारा रचित है। 

भरत भूमि की पुण्य धरा पर
संकट है गहराया ।
गलवान में आकर चीन खड़ा है
ओर सारे भारत में पड़ रही कोरोना
की छाया ।।

पर भारत धधकती ज्वाला है
इस ज्वाला में ये दोनों भस्म हो जाएंगे ।
अपने बीस वीर शहीदों को
हम कभी नहीं बिसराएंगे ।।

आक्साई चीन जो कभी
अक्षय भारत कहलाता था ।
इन्हीं सब क्षेत्र मिलकर हीं तो
भारत का शीश मुकुट बन पाता था ।।

हमें आक्साई चीन भी लेना है
भारत मां का मुकुट सजाने को ।
हमने अपनी कमर कस ली है
अपना पौरुष दिखलाने को ।।

अपने देश के रणबांकुरे
रणभेरी हैं बजा रहे ।
दुश्मन की छाती पर चढ़ने को
ये सभी अकुला रहे ।।

चीनी सामानों का बहिष्कार कर
हम अपना जलवा दिखलाएंगे ।
हम कभी छेड़ छाड़ नहीं करते
पर कोई हमें छेड़े तो ,
उसको सबक सिखाएंगे ।।

वीर भूमि भारत माता है
भारत जननी बहुत महान है ।
भारत माता की सेवा के खातिर
यहां तत्पर हर सन्तान है ।।

दुश्मन कान खोल कर सुन ले
सीमा पर लक्ष्मण रेखा है खिची हुई ।
पार न करना लक्ष्मण रेखा
वरना समझो लाशें तेरी है बिछी हुई ।।

           जय प्रकाश अग्रवाल
                   बलांगीर

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